धनास, चण्डीगढ़ | भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर 'शहीद स्मृति संकल्प अभियान' के तहत चण्डीगढ़ के धनास में 'दिशा छात्र संगठन' और 'नौजवान भारत सभा' द्वारा नुक्कड़ सभाओं, पैदल मार्च और पर्चा वितरण जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों के बीच बात रखते हुए कहा गया कि भगतसिंह और उनके साथियों को याद करना हमारे लिए आज कोई रस्मी कवायद नहीं हो सकती है। आज हमें अपने महान शहीद क्रान्तिकारियों की विरासत को लोगों तक लेकर जाने की ज़रूरत है ताकि मौजूदा "गतिरोध की स्थिति" को तोड़ने के लिए "क्रान्ति की स्पिरिट" को ताज़ा किया जा सके।.....#bhagatsingh #Sukhdev #Rajguru #dhanas ... See MoreSee Less
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23 मार्च। भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के अवसर पर उनकी क्रान्तिकारी विरासत की याददिहानी।#bhagatsingh #revolution #revoultionaries ... See MoreSee Less
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(Scroll down for English)पंजाब यूनिवर्सिटी चण्डीगढ़ में संघ और भाजपा के प्रवक्ताओं के प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगाओ!कैम्पस है हम छात्रों का, संघ की जागीर नहीं!आज चण्डीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में संघ और भाजपा के नेता बतौर वक्ता आमंत्रित थे। इस कार्यक्रम के विरोध में यूनिवर्सिटी के तमाम छात्र संगठनों ने एक प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस प्रदर्शन को शुरू होने से पहले ही भारी पुलिस बल के दम पर रोक दिया गया और प्रदर्शनरत छात्रों को डिटेन कर लिया गया। आज की इस घटना को देशभर में विश्वविद्यालयों को फ़ासीवाद की प्रयोगशाला बनाने के भाजपा की कोशिशों की कड़ी में देखे जाने की ज़रूरत है। भाजपा ने पिछले एक दशक के दौरान शैक्षणिक संस्थानों में अपने शिक्षकों के नाम पर फ़ासीवादी गुर्गों को घुसाने का काम किया है। संघ की फ़ासिस्ट गुण्डा वाहिनी एबीवीपी को तमाम संस्थानों में यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से खुली छूट हासिल है। पंजाब यूनिवर्सिटी चण्डीगढ़ भी इससे अछूता नहीं है। दिशा छात्र संगठन छात्रों-युवाओं और इंसाफ़पसन्द नागरिकों से शिक्षण संस्थानों और पूरे समाज को संघ की प्रयोगशाला बनाने के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान करता है। किसी भी यूनिवर्सिटी कैम्पस में राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ताओं के प्रवेश पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए।Ban the Entry of RSS and BJP Spokespersons at Panjab University, Chandigarh!The campus belongs to us students, not to the RSS!Today, an event was organized at Panjab University, Chandigarh by the Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP). Leaders associated with the RSS and the BJP had been invited as speakers for this program. In opposition to this event, various student organizations of the university had called for a protest. However, even before the demonstration could begin, it was suppressed through heavy police deployment, and the protesting students were detained.This incident must be viewed as part of the broader attempt by the BJP to turn universities across the country into laboratories of fascism. Over the past decade, the BJP has systematically worked to infiltrate educational institutions by installing fascist operatives in the guise of teachers and administrators. The RSS’s fascist cadre organization, the ABVP, has been granted free rein by university administrations across numerous institutions. Panjab University, Chandigarh, is no exception.Disha Student Organization calls upon students, youth, and all justice-loving citizens to unite against the attempt to turn educational institutions — and society as a whole — into laboratories of the RSS. The entry of spokespersons of political parties into university campuses must be completely prohibited.....#puchandigarh #rss #bjp #campus #Fascism ... See MoreSee Less
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बीते 13 मार्च, 2026 (शुक्रवार) को दिशा छात्र संगठन की ओर से बीएचयू की आर्ट्स फैकल्टी में 'ईरान-अमेरिका युद्ध : साम्राज्यवाद का गहराता संकट और इसके दुष्परिणाम' विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गयी। गोष्ठी का संचालन करते हुए दिशा छात्र संगठन के ध्रुव ने कार्यक्रम के स्वरूप और उसके उद्देश्य पर बात रखी। विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर लता ने विषय पर सविस्तार बात रखी। लता ने ईरान के राजनीतिक इतिहास और उसमें अमेरिकी दखल पर भी चर्चा की तथा ईरान पर हुए हालिया अमेरिकी-इज़रायली साम्राज्यवादी हमले की निन्दा की। उन्होंने बताया कि युद्ध का मुख्य कारण अमेरिका की साम्राज्यवादी नीतियाँ हैं और अमेरिका अब वेनेज़ुएला के बाद ईरान के कच्चे तेल भण्डार और स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ पर अपना स्वामित्व स्थापित करना चाहता है। इस युद्ध की वजह से दुनियाभर में पैदा हुए संकट और इसके दुष्परिणाम को भी उन्होंने रेखांकित किया। गोष्ठी में मौजूद छात्रों ने बताया कि एलपीजी गैस की किल्लत की वजह से उन्हें भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छात्र बहुत इलाकों में अव्वलन तो एलपीजी गैस की कमी है और अगर कहीं गैस मिल भी रहा है तो तिगुने-चौगुने दामों में। बीएचयू के अलग-अलग छात्रावासों में मेस या तो बन्द हो रहे हैं या फिर अपने मेन्यू में कटौती कर रहे हैं। छात्रों ने मोदी सरकार की गलत विदेश नीतियों और साम्राज्यवाद को इस संकट का ज़िम्मेदार ठहराया।गोष्ठी में छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की तथा साम्राज्यवाद और भारत सरकार की ग़लत विदेश नीतियों के ख़िलाफ़ हस्तक्षेप पर भी सहमति प्रकट की। ... See MoreSee Less
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